

धनबाद: खबर तोपचांची प्रखंड की है, जहां कतरी नदी के अस्तित्व को मिटाने की कोशिश जारी है। यहां पत्थर माफियाओं और लीज प्राप्त पत्थर कंपनी ने नदी पर ही अवैध अतिक्रमण कर दिया है।
मामला तोपचांची प्रखंड के कालाझर मौजा में लगभग 4 एकड़ 21 डिसमिल क्षेत्र में महामाया एग्रीगेट एलएलपी कंपनी एवं उसके पार्टनर्स एस आर संज्ञेय, मयंक व रोहित खाटूवाला के द्वारा पत्थर क्रेशर संचालित किया जा रहा है।
यहां क्रेशर तक पत्थरों की ढुलाई को आसान बनाने के लिए कतरी नदी पर अवैध रूप से कच्चा पुल बना दिया गया है। इस पुल का निर्माण ओबी (ओवरबर्डन) पत्थरों और लगभग 5 गोलाकार सीमेंट पाइपों को रखकर किया गया है। इस निर्माण से नदी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह प्रभावित हो गया है। पानी का प्रवाह बाधित होने से जलजमाव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है। इधर
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से ही पत्थर खनन और क्रेशर के कारण धूल और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। अब नदी पर अतिक्रमण कर पुल बना देने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। एक ओर जिला प्रशासन द्वारा नदियों के संरक्षण को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खुलेआम नदी पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य होना कई सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार नदी के बीच इस तरह का निर्माण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है। इससे न केवल नदी का अस्तित्व संकट में पड़ता है, बल्कि आसपास के इलाके में जलस्तर और पारिस्थितिकी संतुलन भी प्रभावित होता है।
निरीक्षण और निर्देश पर भारी पत्थर माफिया
एक ओर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नमामि गंगे के तहत नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और पुनर्जीवन पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कतरी नदी पर खुलेआम अतिक्रमण और अवैध निर्माण जारी है।
मालूम हो कि विगत दिनों धनबाद के उपविकास आयुक्त और नगर आयुक्त ने कतरास क्षेत्र में कतरी नदी के घाटों का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान जलाशयों के संरक्षण और स्वच्छता के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए थे।
इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि नदी पर अवैध पुल का निर्माण कर उसके अस्तित्व के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।





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